19 may 2014, 8.30 PM, Published on Facebook ans sent all by Email on the same Date.
2014 के जनरल इलेक्शन का विश्लेषण यह भी हो सकता है----...
RSS का अजेंडा नं. 1 --------
1) भाजपा के जित का सबसे बडा कारण-- कॉंग्रेस और भाजपा का चुनावी समझौता!!
क्या है यह चुनावी समझौता----- ????
2) मोदी केवल भाजपा के PM candidate नही बल्की कॉंग्रेस के सहमती से BJP-PM candidate है।
ऐसा क्यों-------
3) मोदी अगर PM candidate होंगे तो मुसलमानोंमे अखिल भारतीय दहशत निर्माण होगी और सभी मुस्लीम एक होकर कुछ सोचेंगे--
क्या सोचेंगे---???
4) आज मुस्लीमोंकी स्थिती-- आधे मुलायम.. आधे कॉंग्रेस और बाकी नितीश और बचे हुए मायावती के तरफ...
5) ''मुस्लीमो दिल्ली मे जानेसे मोदी को रोखना है तो कॉंग्रेस के पीछे खडे हो जाव। वरना अगर दील्ली मे मोदी पहुच गया तो तुम्हारी खैर नही।''
6) ताकी मोदी को रोखनें के लिए सब मुस्लीम कॉंग्रेस के पीछे खडे होंगे और लालु मुलायम नितीश माया सब बिन-मुस्लीम हो जाऐंगे--- याने के उनकी हार की 50 परसेंट गॅरंटी!!
दुसरी महत्वपुर्ण बात-----
RSS का अजेंडा नं. 2 --------
1) देशमे हर दस साल मे एकबार ओबीसी लहर waive (सुनामी नही, लाट) चलती है, कभी वो राष्ट्रभक्ती के नामसे, कभी दुसरी आझादी के नामसे तो कभी हिंदुत्व के नाम से उभर आती है और देशमे सामाजिक-राजकीय परिवर्तन लाने को मजबूर कर देती है।
2) ईस लहर waive को दबाने के लिए जो प्रयास मनुवादी शक्तींया करती है, वही ईस लहर को अलग अलग नाम देकर उसको डाईव्हर्ट करने की कोशीश भी करती है।
3) मगर लाखो बहुजन-ओबीसी कार्यकर्ता के जनजागृती के प्रयास के कारण अब ओबीसी लहर केवल 'ओबिसी' के नामसे आगे आ गयी है।
(यह बात हमने गुजराथ जाकर लिखित रुपसे कही थी। तात्यासाहब माहात्मा जोतीराव फुले और डॉ. बाबासाहब आंबेडकर संयुक्त जयंती समारोह कि तरफसे गुजराथ के ओबीसी संघटनोंने मुझे आमंत्रित किया था। सुरत, बडोदरा, बार्डोली, भरुच जैसे 5 शहरोंमे मेरे लेक्चर आयोजित किये थै। 11 एप्रिल 2012 के दिन सुरत मे प्रेस कॉन्फरन्स आयोजित की थी। मेने प्रेस कॉन्फरन्स मे लिखित रुपमे निवेदन किया की, मोदी प्रधानमंत्री बननेवाले है, क्योंकी ओबीसी लहर (Wave, spate) अब ओबीसी के नाम से आ रही है। यह निवेदन मेरी मराठी किताब ‘ओबीसीं का संघर्ष पथ’ मे प्रकाशित किया गया है। )
4) यह ओबीसी लहर लालु, मुलायम, नितिश, करूणानिधी को दिल्ली (Delhi) मे मजबूत बनाकर भेज देगी, यह गॅरंटी भलेही इन चारों (मुर्खों) को ना हो, मगर मनुवादी संघटन को थी।
5) अब इस बार ओबीसी लहर को कोई और नाम देकर डाईव्हर्ट नही कर सकते या दबा नही सकते, ईसलिए उसको अब कॅश कर ने के सिवाय कोई दुसरा पर्याय मनुवादीं के सामने नही था। मनुवाद का वर्चस्व कायम रखना चाहते तो उसे कॅश करो।
6) ईस ओबीसी लहर को कॅश करने के लिए भाजपा मे कोई ओबीसी-मुखवटा चाहीए था जो मोदी के रुपमे बचा था। कल्याणसिंग, उमा वगैरे जैसे ओबीसी लिडर पहले ही खतम कर दिये गये थै। मोदी इसलिए बच गये क्यों की उनका खुद का नेटवर्क था।
7) ओबीसी पहचान लेकर मोदी को पुरे देश मे घुमाया। संघ परीवार बिच बिच मे मोदी के कंधेपर हिंदुत्व की शॉल डालता रहा। मगर मोदी उस शॉल को झट से झटकते रहे।
8) चुनावी घोषण पत्र मे मंदीर, हिंदुत्व, काश्मिर वगैरा मुद्दे नही आने चाहिए इसलिए मोदी ने भरपुर कोशिश की, जिसकि वजहसे यह घोषणा पत्र चुनाव का पहला दौर खतम होने के बाद भी प्रकाशित नही हो सका।
9) चुनाव के हर भाषण मे मोदी अपने पिछडे (ओबीसी) पन का बार बार जिक्र करते थे। ताकी 52 परसेंट ओबीसी व्होटबँक ‘सिर्फ ओबीसी’ नाम से उसके पिछे खडी हो जाय।
10) चुनाव के आखरी दिनो मे प्रियंका का मुद्दा तोडमरोडकर जान बुझकर misuse कर के मोदि ने अपनि ‘जात’ पुरे देश को बता दी| क्योंकि केवल ओबिसी कॅटेगिरि बताने से OBC vote नही मिलेगा, यह जानकर मोदि ने अपनी 'जात' बताना जरुरी समझा।
11) ईस देश को आप भारत कहे या हिंदुस्थान, इंडिया कहे या आर्यावर्त आपको जात बताए बिना पिने को पानी भी नही मिलता, वोट कहा से मिलेगा।
12) इसलिए मोदि चाहते थे जातीगत धृवीकरण और संघ चाहता था ओबीसी डॉमिनेटेड धार्मिक धृवीकरण जिसमे वोट तो ओबीसी का मिले लेकीन ओबीसी को ओबीसी पहचान ना मिले।
13) लेकीन आखरी मे धार्मिक धृवीकरण हार गया और जातिगत धृवीकरण जीत गया।
14) इस देशका वास्तव जातीव्यवस्था है, धार्मिक व्यवस्था नही।
निष्कर्ष ---
1) मोदी को संघ ने जितना कहा था उतनाही अगर वो करते तो वो 200 सिट के अंदर ही रहते। और संघ भी वही चाहता था। ताकी PM post के लिए मोदी, अडवाणी, सुषमा वगैरे के बिच जोरदार लढाई चले और संघ अपने पसंद का कोई और (मुरली मनोहर जोशी) को PM post पर बिठा दे।
2) मोदी यह भी जानते थे के अगर 200 से कम सिट आयेंगी तो मेरी जगह PM की कुर्सि मे नही जेल की बराक मे होगी।
3) मोदी को ओबीसी लहर का मुखवटा बनाने का मुख्य उद्देश लालु, मुलायम, करुणानिधि, नितिश को ओबीसी वोटबँक से हटाना था, जो उद्देश सफल हो गया।
4) मगर वो इतना ज्यादा सफल हो गया के अब संघ परीवार की निंद उड गयी है।
5) और एक महत्वपूर्ण बात यह है के--- तिसरी आघाडी मुलायम,नितिश, करूणानिधि के वजहसे ओबीसी डॉमिनेटेड होती है। उसमे जयललिता, ममता और पटनाईक जैसे ब्राह्मिण है । अब चुनाव के बाद अगर तिसरी आघाडी बनेगी भी, तो वो ओबीसी-शुन्य रहेगी। क्यों की तिनो ओबीसी नेताओं को 5, 2 और शुन्य सिटे मिली है।
6) तिसरी आघाडी के ब्राह्मिण नेता 2009 से ज्यादा सिटे जित गये, और ओबीसी के नेता शुन्य हो गये। ओबीसी की लाट मे तिसरी आघाडी के ओबीसी नेता बह गये और ब्राह्मिण नेता जीत गये, ऐसा कैसे हो सकता है???
7) ओबीसी की लाट- लहर थी , मगर वो ईतनी भी अंधी नही थी।
8) जीस EVM मशिन को युरोप के सभी प्रगत देशो ने एक बार उपयोग करके फेंक दिया है, वो हमने क्यो अपनाया है।
9) सॅटेलाईट से धरती पर की बहोत सी बाते नियंत्रित होती है, क्या देशकी मार्केट को लुटने के लिए सैतानी बहुमतवाली सरकार चाहता था अमेरिका ???
10) इसलिए अब एक आंदोलन आपको और करना पडेगा---चुनाव प्रक्रिया से ' EVM को हटाव और Democracy को बचाव!'
ओबीसी नेता के लिए Action Program ---
1) ओबीसी के पॉलीटिकल नेताऔं को लगता है की दो जातीया या और एक मॉयनॉरिटी की बेरीज कर के हम हमेशा के लीए सत्ता मे रहेंगे।
2) लेकीन मनुवादी नेता, जिन को संघ परिवार नियंत्रित करता है, वो विचारधारा के आधार पर राज करते है। गांधीवाद, पुंजीवाद, हिंदुत्ववाद आदी अलग अलग उस के रूप है। इतना ही नही मनुवादियों ने क्रांतीकारी मार्क्सवाद को भी जाणवा पहनाकर ब्राह्मिण बना दिया है।
3) विचारधारा के आधार पर राज करोगे तो पर्मनंट सत्ता मे रहोगे।
4) बहुजन-ओबिसी नेताऔं के पास फुले, आंबेडकर, पेरीयार, लोहीया वगैरे जैसे जातीव्यवस्था खतम करनेवाली विचारप्रणाली है। लेकीन इस तत्वग्यान-विचारों को ना वो आचरन मे लाते है, ना ही उनका प्रचार-प्रसार। बहुजन ओबीसी जनता उनको सत्ता देती है, मगर वो सोचते है के सत्ता हमे हमारे परिवार को मिली है, पैसे कमाने के लिए मिली है। भाई MLA, लडका MP, बहु CM भतिजा Minister और खुद को तो प्रधानमंत्री बनना होता है।
5) गलती से भी वो यह नही सोचते के, हमे सत्ता बहुजन-ओबीसी के वजहसे मिली है, तो ज्यादा से ज्यादा जातियों मे सत्ता का वितरण हो।
6) इसका परिणाम यह होता है की, उनकी जात छोडकर बाकी सब पिछेडी जातीया एक तो दुसरा पर्याय ढुंढती है, नही तो वो फिरसे मनुवादी पार्टी से जुड जाती है। (जैसे अब 2014 मे, वो भाजपा से जुड गयी)
7) बहुजनो मे विचारधारा के आधार पर काम करने वाले कार्यकर्ताऔं को मदद करने के बजाय उसको दबाया जाता है।
8) संघ परिवार की पुरे देशमे दो लाख से भी ज्यादा शिशू शाला, सरस्वती संस्कार केंद्र है जो ओबीसी बहुजन बच्चों को बचपन मे ही ब्राह्मणवादी बनाती है। 10 हजार से भी ज्यादा वनवासी आश्रम है, जिस मे हजारो आदिवासी बच्चे मनुवाद का पाठ पढते है।
9) सरकारी स्कुल कॉलेजों मे मनुवादी पाठ्यक्रम ज्यादा आक्रमक तरीकेसे नही पढाया जा सकता है। इसलिए उन्हों ने अपने विविध संघटन के माध्यम से यह शिक्षा कार्यक्रम चलाया है।
10) ओबीसी-बहुजन बच्चों को घरमे, शिशू शाला मे और स्कूल कॉलेजों मे मनुवादी संस्कार मिलते है, इसलीए समाज मे राज्य कॉंग्रेस-भाजपा का हो या SP-BSP-द्रमुक का, ब्राह्मणों के हित मे ही काम करता है।
11) ओबीसी-बहुजन समाज के जो प्रामाणिक कार्यकर्ता किसी भी व्यक्तीगत लाभ से दुर रहकर विविध क्षेत्र मे काम करते है। मगर उनको एक भी सांसद, विधायक, मंत्री या सरकार मदद नही करती।
12) आज ओबिसी बहुजनों के हित मे फॉरवर्ड प्रेस का मॅगॅझिन, बहुजन संघर्ष जैसे विकली प्रकाशित हो रहे है। 9 राज्य मे ओबीसी सरकार होने के बावजूद उनको कोई मदद नही मिल रही है। बामसेफ, ओबीसी सेवा संघ जैसे अनेक संघटन गैर राजनितिक होकर काम कर रहे है। हम 20 साल से सत्यशोधक ग्यानपीठ (University) चला रहे है, जिसकी माध्यम से फुले, आंबेडकर, पेरियार, लोहीया, कबीर जैसे महापुरूषों के विचारधारा पर आधारित पाठ्यक्रम बनाकर परीक्षाए ले रहे है। यह प्रोग्रॅम अब ऑल इंडिया स्तर पर चल रहा है। मगर ओबीसी-बहुजन राज्यकर्ताओं को इसकी खबर तक नही... (मगर इसकी पुरी खबर RSS को है।)
13) डॉ. बाबासाहब आंबेडकर और तात्यासाहब महात्मा जोतीराव फुले जी कहते थे ‘विचारों की क्रांती के बिना कोई राजकीय क्रांती नही होती।
14) इसलिए आज जो भी ओबीसी बहुजन सत्ता मे बैठे है वे एक बात जान ले की, उनकी सत्ता की माध्यम से उन के परीवार के 1 या 2 पीढी का भला हो सकता है। लेकीन उसके बाद जब आप सब सत्ता से उखाड दिऐ जाओगे, तो ब्राह्मण- क्षत्रियों के कुत्ते भी बनने लायक नही रहोगे।
धन्यवाद.....!!
------------------------ ------------------------ प्रा. श्रावण देवरे,
नाशिक, महाराष्ट्र
मोबाईल—94 22 78 85 46
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